October 21, 2021

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रेड रॉट रोग से गन्ने की फसल हो रही बर्बाद

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रिपोर्ट – मो सद्दाम हुसैन

देवरिया: जिले के गढ़रामपुर (डॉ. प्रदीप राव)। गन्ने की फसल रेड रॉट (कोलेटोट्राइकम फाल्केट्म) रोग से बर्बाद हो गई हैं । इस रोग के लगने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं । इसे लेकर हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है की यदि बुआई के समय से किसान कुछ सावधानी बरतें तो फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है । गौरतलब है कि रेड रॉट अथवा लाल सड़न (कोलेटोट्राइकम फाल्केटम) एक भूमि जनित व बीज जनित रोग है। यह गन्ने के लिए एक प्रकार का केंसर है । इस रोग के लगने से गन्ने की मिठास ख़त्म होने के साथ ही फसल सूख जा रही है । गन्ने की खेती करने वाले किसान रेड रॉट बीमारी से खासा परेशान हो रहें हैं । गन्ने की किस्म कोशा 0238 रेड रॉट बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित हुई है । इसके अलावे 0218 एवं 0219 प्रजाति के गन्ने में भी इस रोग का प्रभाव है । यूं तो समूचे पूर्वांचल में इस रोग का प्रकोप है । मगर देवरिया जनपद के तरकुलवा, पथरदेवा , देसही देवरिया आदि विकास खंडों में तो इस रोग का खासा असर दिखाईं दे रहा है । इस रोग की चपेट में आकर गन्ने की फसल खेतों में सूख कर बर्बाद हो चुकी है । समूचे जनपद के किसानों की लगभग 80 फीसद गन्ने की फसल सूख गई है । किसान महंगी- महंगी किट नाशक दवाओं का छिड़काव कर चुके हैं , फिर भी रेड रॉट (लाल सड़न) रोग की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है । लगातार खेतों में किट नाशक का छिड़काव करने के बाद भी गन्ना सड़ कर सूख गया है । मौजूदा समय में किसान क्रेशर पर भी औने-पौने दामों में गन्ने की बिक्री करके एक चौथाई लागत भी वापस ले पाने की स्थिति में नहीं है।

गन्ने की किस्म कोशा 0.238 सर्वाधिक प्रभावित, सावधानी बरत कर फसल बचा सकते है किसान

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