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गाड़ी, माइक्रो फाइनेन्स, पर्सनल लोन की किस्तों पर लगे मेरिडोरीयम

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रिपोर्ट – मो सद्दाम हुसैन

देवरिया: आज पूरा देश कोविड 19 की मार झेल रहा है।हर कोई जान बचाने की बात सोच रहा है।पुलिस लॉक डाउन का अक्षरशः पालन कराने की कोशिश कर रही है।इस तरह उद्दोग धंधे, प्राइवेट सेक्टर मे बेरोजगारी चरम सीमा पर है।इस प्रकार जीवन थम सा गया है।
लॉक डाउन की घोषणा के बाद लोगो के जेहन में पिछली साल की तरह के सारे परिदृश्य आने लगे थे।लोगो को इस तरह की कोई आशा नहीँ थी कि इस साल भी स्थिति बेकाबू हो जायेगी।लेकिन मौत का शिलशिला जब थमने का नाम नहीँ ले रहा था तो यकीन हो गया कि स्थिति काफी हद तक गंभीर है।लोग भोजन की ब्यवस्था मे जुट गए हैं।कहीँ कर्ज लेकर भोजन की ब्यवस्था, तो कहीँ मजदूरी करके, तो कहीँ दूसरे के सहारे की ब्यवस्था, ऐसी स्थिति में जब किसी परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ जाता है तो मानो विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा हो।और लोग सँभालने मे ही सब कुछ गवां देते हैं। अब एक नजर उन लोगों पर डालें, जो फाइनेन्स कंपनियों से या तो गाड़ी लोन कराए हैं, या पर्सनल लोन लिये हैं, या माइक्रो फाइनेन्स से समूह का लोन लिये हैं।वे लॉक डाउन मे बिलकुल ही बेरोजगार हैं।EMI भरने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं।लेकिन संबन्धित कंपनी का एजेंट हर हाल में पैसे जमा करने के लिए दबाव बनाता है, यहाँ तक कि कुछ तो अपशब्द भी कह देते हैं।परिस्थिति बस ग्राहक भी सब कुछ सुनता है।ऐसी स्थिति में सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित(लॉक डाउन) समय तक EMI न भरने का आदेश जारी किया जाना चाहिए।जो जनहित में है।ताकि लोग अपना जीवन यापन कर सकें।

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