November 27, 2021

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महापुरूषों पर समीक्षात्मक बुक है ”स्मृति में है जीवन’

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रिपोर्ट – सद्दाम हुसैन

देवरिया: (उ0प्र0) देवरिया जिले मे स्वामी विवेकानंद ने अपने धर्म में मानव समाज की सेवा को महत्वपूर्ण स्थान देते हुए कहा है कि ”देशवासियों के उद्धार के पुनीत कार्य के लिए मुझे मोक्ष छोड़कर नरक में भी जाना स्वीकार है।” ऐसे ही भारत के महान समाज सुधारकों पर बरहज निवासी लेखक डॉ. विवेकानंद उपाध्याय एवं डॉ. संजय यादव की सद्य: प्रकाशित पुस्तक ”स्मृति में है जीवन” तफसील से समीक्षात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है। पुस्तक की विद्वतापूर्ण भूमिका केरल के श्री राज्यपाल/महामहिम आरिफ मोहम्मद खान ने लिखी है।
पुस्तक के इस प्रथम खंड में संत कबीरदास से लेकर संत बाबा राघवदास आदि समाज सुधारकों पर विस्तार से उनके महान कार्यों का समीक्षात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक के नौं वें व दस वें अध्याय में 18 अप्रैल-1951 को संत विनोवा भावे द्वारा देश में चलाए गए भूदान यज्ञ में शामिल देश के भूदान पद यात्रियों, स्वतंत्रा संग्राम सेनानियों, भू दान वीरों तथा भूदान यज्ञ में देवरिया आए संत विनोवा भावे का विस्तार से वर्णन किया गया है।
पुस्तक की खास बात यह है कि लेखक द्वय ने अपने खोजपूर्ण तथ्यों से देवरिया जिले के भूदान पद यात्रियों व भूदानियों के योगदान को उजागर करने का सफल कार्य किया है, जो अब तक अप्राप्त व गुमनाम थे। जैसे पत्रकार स्व. पं. सिंहासन तिवारी ‘कांत’, संपादक शिवदास तिवारी, भूलन गोड़ आदि के योगदान की भी चर्चा है। पुस्तक में देवरिया जनपद का स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्वांचल के गांधी कहे जाने वाले संत बाबा राघवदास का अवदान और शहीदों की शहादत का उल्लेख कर जिले को राष्ट्रीय फलक पर ले आने का भगीरथ प्रयास किया है।
लेखक द्वय के कठिन श्रम साधना और जगह-जगह महत्वपूर्ण दुर्लभ ग्रंथों, किताबों से संदर्भ देने से यह एक रिफरेन्स (संदर्भित) बुक बन गई है, जो शोधार्थिंयों व प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए अति उपयोगी बन गई है। तभी तो पुस्तक की अपनी लंबी भूमिका में श्री राज्यपाल/महामहिम आरिफ मोहम्मद खान ने लिखा है कि ”स्मृति में है जीवन पुस्तक में डॉ. विवेकानंद उपाध्याय एवं डॉ. संजय यादव ने भारतीय संस्कृति को समझने व समझाने का सार्थक प्रयास किया है।”

यह पुस्तक भारतीय मनीषा के आदर्श कार्यों को जनसुलभ बनाने का एक बड़ा प्रयास है। पुस्तक दीदउगोविविगो के राजनीति विज्ञान के उदभट विद्वान यश:शेष प्रो. रामकृष्ण मणि त्रिपाठी को समर्पित है। अमेजन व फ्लिकार्ट पर मिलने वाली यह किताब अत्यंत रोचक, पठनीय, संग्रहणीय और पाठकों को अंत तक बांधे रखने में सफल है

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