September 20, 2021

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देवरिया के इस मंदिर में खूब होता है चमत्कार बैकुंठपुर राम मंदिर

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रिपोर्टर – सद्दाम हुसैन

देवरिया: (उ0प्र0) के देवरिया जिले को देवों के नगरी देवरिया कहा जाता है देवरिया को तपोभूमि भी कहा जाता है महर्षि देवराहा बाबा इसी देवरिया के भूमि पर अपना तप किए थे यहां तक बताया जाता है कि देवराहा बाबा के तपोभूमि जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर पूरब है मईल चौराहा से 3 किलोमीटर दूर सरयू नदी के किनारे है जहां इंदिरा गांधी देश के प्रथम राष्ट्रपति और फिल्म जगत के बड़े अभिनेता यहां तक के आज तक के तेज तरार पत्रकार एंकर
स्वर्गीय रोहित सरदाना भी बाबा के दर्शन करने आ चुके हैं | लेकिन मैं आज बात करने वाला हूं देवरिया के बैकुंठपुर राम मंदिर की जो जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर पूरब दिशा में छोटी गंडक नदी के किनारे स्थित है इस मंदिर की कहानी अलग-अलग लोगों से अलग-अलग तरीके से सुनने को मिलता है कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर की तरह पूरे दुनिया में कोई मंदिर नहीं है इसकी गुंबज बहुत ज्यादा लम्बा है और इस मंदिर में हर वर्ष राम सीता लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न की शादी की जाती है नाग पंचमी के दिन होता है जिसमें भारी संख्या में लोग इस विवाह को देखने के लिए आते हैं ओर यहां मेला भी लगता है जिसे बैकुंठपुर मेला के नाम से दूरदराज के लोग जानते हैं और पुलिस प्रशासन के द्वारा मेले में सुरक्षा व्यवस्था संभाली जाती है बात करें इस मंदिर की चमत्कार की तो कुछ लोगों का कहना है इस मंदिर में एक बार रात में चोरी की नियत से कुछ लोग चले आए और मंदिर के गुंबज के ऊपर हिसाब है बताया जाता है की प्योर सोना सोने का त्रिशूल है जिसे चुराने के लिए चोर मंदिर के बने छत पर चल गए लेकिन अचानक कुछ ऐसा चमत्कार हुआ जिससे उन सभी चोरों को दिखना बंद हो गया पूरी तरह से वह अंधे हो गए और सुबह हुई तो लोगों ने देखा कि मंदिर के छत पर कुछ लोग हैं जब उनके पास गया और पूछताछ की गई पता चला कि यह चोरी करने आए थे यह बात कितनी सच है इसके बारे में अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है और इस से जुड़ एक और मान्यता है जब यहां पर राम सीता लक्ष्मण शत्रुघ्न भरत की शादी होती है तो प्रसाद के रूप में पुआ बनाया जाता है जो लोगों को वितरण किया जाता है पहले देसी घी में झाना जाता था एक बार देसी घी पुआ झान्ते समय अचानक ही खत्म हो गई इस बात का पता मंदिर के मुख्य पुजारी महावारी महाराज को चली उन्होंने कहा बगल से छोटी गंडक नदी बहती है वहां से जाकर यह बोलिए हे गंगा माता हमें दो डब्बा की दीजिए और बाद में हम आपको लौटा देंगे और डिब्बे में पानी भर कर चले आइए भक्तों ने यही किया और जब डिब्बा खोला गया था उसमें गिव हो गया था यह सारी बातें बैकुंठपुर क्षेत्र के बुजुर्गों के मुख से सुना जा सकता है लेकिन इस मंदिर की भव्यता इस बात से जाना जा सकता है कि वह मंदिर जम्मू कश्मीर तक प्रचलित है जम्मू-कश्मीर के भी व्यापारी यहां पर आकर मेले में अपने सामान बेचा करते थे अब धीरे-धीरे मेला का महत्व खत्म होता जा रहा है और लोगों की भीड़ कम होती जा रही है

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