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सपा के लिए भारी पड़ सकती है देवरिया की बरहज विधानसभा सीट

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रिपोर्ट – सद्दाम हुसैन

देवरिया: (उ0प्र0) देवरिया जिले के बरहज विधानसभा क्षेत्र में दलबदलू नेता की चर्चा जोरों पर है। यहां के सपा उम्मीदवार मुरली ने टिकट के लिए कई बार दलबदल किया है। जिसके चलते यहां के वोटरों में ऊहापोह है।

कौशल किशोर त्रिपाठी, देवरिया: राजनीति में दल-बदल, नेताओं के लिए आम बात है। मगर जिले के बरहज विधानसभा क्षेत्र (Barhaj Assembly Seat) के सपा (Samajwadi Party) उम्मीदवार मुरली मनोहर जायसवाल के दल बदल का मुद्दा खास चर्चा में है। मुरली पहले बसपा (BSP) में थे। मोदी लहर देखकर भाजपा (BJP) जॉइन की। 2022 के यूपी चुनाव (UP Chunav 2022) में जब भाजपा ने इनको टिकट नहीं दिया तो नामांकन के एक दिन पहले उन्होंने सपा की सदस्यता ले ली। सपा ने मुरली को बरहज विधानसभा क्षेत्र (Barhaj Election 2022) से उम्मीदवार बनाया है। मुरली की दलबदलू छवि चुनाव में सपा के लिए भारी पड़ सकती है। देवरिया में छठे चरण में 3 मार्च को मतदान होना है।

पिता रहे हैं बसपा से विधायक तो बाबा रहे हैं बसपा के सांसद

2007 के मायावती की सरकार में मुरली के पिता व विधायक राम प्रसाद जायसवाल की तूती बोलती थी। राम प्रसाद के बरहज स्थित आवास पर मंडल भर के अधिकारियों का जमावड़ा लगता था। 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने देवरिया लोकसभा सीट से राम प्रसाद के पिता व मुरली के बाबा गोरख जायसवाल को प्रत्याशी बनाया। गोरख चुनाव जीतकर सांसद भी बन गए। कहा जाता है कि उस चुनाव में देवरिया में धनबल का खूब प्रयोग हुआ था। जिसके चलते यह सीट पूरे प्रदेश में चर्चा में आई थी।

प्रदेश के चर्चित एन आर एच एम घोटाले (NRHM Scam) में रामप्रसाद का भी नाम आया। जांच में आरोप साबित होने के बाद रामप्रसाद को जेल हो गई। जेल से छूटने के बाद रामप्रसाद का निधन भी हो गया। 2012 के चुनाव बसपा ने मुरली की माता रेनू जायसवाल को बरहज से प्रत्याशी बनाया था मगर वह सपा से चुनाव हार गईं।
बसपा से भाजपा के बाद अब सपा से उम्मीदवार हैं मुरली
2017 के विधानसभा चुनाव में मुरली मनोहर जायसवाल बरहज विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े। मगर वह भाजपा के सुरेश तिवारी से चुनाव हार गए। चुनाव हारने के बाद मुरली ने हवा का रुख भांपकर भाजपा जॉइन किया और बरहज विधानसभा क्षेत्र से टिकट के लिए दावेदारी की। 2022 के चुनाव में भाजपा ने बरहज से दीपक मिश्रा उर्फ शाका को उम्मीदवार बनाया। ऐसे में नामांकन से एक दिन पहले मुरली ने सपा की सदस्यता ले ली। सपा ने बरहज सीट से इनको उम्मीदवार बनाया है।

मुरली की दल बदलू छवि से वोटरो में उहापोह
लगातार दलबदल करने के चलते मुरली की छवि क्षेत्र में दलबदलू नेता की बन गई है। इसकी चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। ऐसे में यहां सपाइयों में उहापोह की स्थिति है। मुरली अपने पिता के कार्यकाल की दुहाई देकर लोगों से वोट मांग रहे हैं। मगर जनता से उनका जुड़ाव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उम्मीदवार की यह छवि सपा के लिए भारी पड़ सकती। हालांकि दल बदल के सवाल पर मुरली ने बताया कि सेवा का संबंध किसी दल से नहीं होता है। हर सरकार की अपनी नीति होती है। मगर जनप्रतिनिधि निठल्ला हो तो विकास नहीं हो सकता। अब देखना है कि 2022 के चुनाव में मुरली अपनी दलबदलू वाली छवि से बाहर निकल पाते हैं या भाजपा अपना कब्जा बरकरार रखती है।

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